बाजगी भाळ मौसमी आज़ बसन्ती ऋतु गई

बन-बन फूल रही सरसूं सौरभ मनडै भा गई

रथ हांकतौ गयो

बासन्ती बानौ धार

तळै चांदणी दूधाळी में

झुळसै सारा गांव

मुट्ठी भर-भर उड़ै गुलाल तन-मन प्रीत भर्या मुळकाय

बाजगी भाळ मौसमी आज़ बसन्ती ऋतु गई

हरी-भरी मखमली जाज्यां

अलसी घूमर खाय

सरसूं राणी सोनौ पहर्यां

घणी-घणी इठलाय

नद्दी पायलड़ा झणकाय, धोरा अलगोज्या बजाय

बाजगी बाळ मौसमी आज बसन्ती ऋतु गई

कूंपळ-कळियां अल्हड़ झूमैं

मौसम करै जुहार

मदमाता फुलड़ां सूं टपकै

ऊपर ल्हैर उमारं

मोरिया झूमै पांख पसार मोरण्यां देख-देख सरमाय

बाजगी भाळ मौसमी आज़ बसन्ती ऋतु गई

रंग-रंगीली चूनड़ हांसै

मंगळ गीत सुणाय

ताळ मजीरा ढोलक बाजै

हिवड़ा नै धड़काय

गयौ मौसम यौ मधुमास घुळगी रातां मीठी बात

बाजगी भाळ मौसमी आज बसन्ती ऋतु गई

स्रोत
  • पोथी : आंगणै सूं आभौ ,
  • सिरजक : सावित्री व्यास ,
  • प्रकाशक : उषा पब्लिशिंग हाउस ,
  • संस्करण : 2011
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