किहिं कप्पड़ किहिं दिइं कणय, किहिं केकाण कच्छाहि।

धन देयंतो किलकिलइ, पहुवच्छ मन-माहिं॥

स्रोत
  • पोथी : सदयवत्स वीर प्रबंध ,
  • सिरजक : भीम ,
  • संपादक : डॉ. मंजुलाल मजमुदार ,
  • प्रकाशक : सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर ,
  • संस्करण : प्रथम
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