मामो ल्यायौ मारूती, भाणूं न दी भुळाय।
भाणूं मारी भींत में, खोखो दियो बणाय॥
तेल रो खर्चो बचग्यो॥
च्यारूं भाई चोरटा, बापू थाणेदार।
मेहमानां री रात में, घणी करै मनुहार॥
पछै बै जेबां काटै॥
कवि रौ मन पूठौ पड़्यौ, रचना छापी नाय।
संपादक सिरड़ी घणौ, धेलौ नहीं दिखाय॥
सिरजण फोकट में चावै॥
आखर ज्ञान कर्यौ नहीं, आखर दियौ लगाय।
आखर में जो कुछ बच्यौ, आखर दियौ गमाय॥
सट्टौ तो सदां ई भूंडौ
घाटो घाल्यौ छोलियां, जद खरीद्या मूंग।
मूंगां में घुण आ पड़्या, लोग बतावै गूंग ॥
कर्म छींया सागै चालै
लोगां चुनौ लगा दियौ, जद बो लड़्यौ चुनाव।
दारू तेल’र जीप रा, खूब चढ़ाया भाव॥
कीमतां आगै चढ़सी
हवलदार जी हुलसके, जद टंटोळयौ गात।
रो कै बोल्यौ चोरटो, सुणल्यौ म्हारी बात॥
रात लेखक रै फसग्यौ
नुक्सौ लिखकै डाक्धर, पर्ची दी पकड़ाय।
गुरूजी अर्जी समझके, छुट्टी दई लगाय॥
भण्यां री बातां न्यारी
बैल लगाई बापजी, दरवाजै रै बा’र।
घंटी बाज्यां बीनणी, झट सूं देख्यौ जा’र॥
भीखारी आटौ मांगै
भगतण ल्याया भगत जी, भूंडो होग्यौ काम।
गळी-मोहल्लै लोगड़ा, चर्चा कर दी आम॥
कुटिया सूं कोठो होग्यौ