पागल-पागल सब कैवै, गल पावै नहीं कोय।

गल पायै स्यूं गल बणै, बावड़ जलम नहीं होय॥

जगत स्यूं जफ्फी छूटै—

साधन, कर्ता, करणगत, चौथो कहियै काम।

भाग साथ जे ना देवै, ठाली रहज्यै ठाम॥

हूणी पर जोर नी चालै—

वोटर लिस्ट स्यूं छांटगे, पर्ची दी पकड़ाय।

फोटू तो धन गो मिल्यो भाईड़ो ग्यो चकराय॥

बाबूड़ा ठगी करग्या—

डाकू जा'र चोरटा, रळ मिळ होग्या अेक।

घण करै घर कबजो कर्‌यो सायब राखै टेक॥

देस गो राम रुखाळो—

नागां मोती नीपजै, नागां सरख नेह।

नाग मुकट है देशगा, नागां तणो ही मेह॥

नागां ही राज कुहावै—

पग भारुं बहू गो सुण्यो, सासू घणो उछाव।

हालरियो हुलराय स्यां सुसरै मन भी चाव॥

बहू अल्ट्रासाऊंड चावै—

लकड़ी नै तकड़ी करै, गुड़ गीलो हो ज्याय।

लूण रळाल्यै आप में, माणस करै सवाय॥

पाणी नीयत सर पोष—

कुल'र सन्त शरीर गो, ओही शील सुभाव।

तातो झेलै डील पर ठण्डो कर’र झलाय॥

मांय जे पाणी हुवै तो—

आंख, नाक पाणी पड़ै, नहीं डील में तन्त।

कर जोड़्यां कामण कैवै, थे पोस्त छोडो कन्त॥

नहीं म्हारो लारो छोडो—

बाबू बाजै बादशाह, निज कर्म थळी मांय।

अफसर चाहे नाट ज्या बाबू दे सळटाय॥

भार कागद पर चावै—

राखी-राखी सामगे भैण भाई गो नेह।

फूलां में सरम जिती, जित्तो बादळ में मेह॥

बींस्यूं दूणो करै राखी—

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : वैद्य दयाल प्रकाश शर्मा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक–18
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