पउढि म परहरियाह, आरँभ करि ऊपरि असुर।
देवि दुवार थियाह, वेनतियाइत बीसहथि॥
भावार्थ :- हे देवी! आप इस समय योगनिद्रा में लीन न हों। अपनी इस गहरी निद्रा को त्याग कर जागिए और संसार में बढ़ रही आसुरी शक्तियों (असुरों) का विनाश करने के लिए युद्ध का शंखनाद कीजिए। हे बीस भुजाओं वाली महाशक्ति! मैं अपनी इसी करुण पुकार और विनती के साथ आपके द्वार पर आया हूँ, मेरी रक्षा करें और दुष्टों का संहार करें।