गळै गळपोट्यां गालकर, अंतस'रा आखर बांचैली।

उण घड़ी मिजाजण देखज्यै, प्रीत हथैळ्यां राचैली॥

स्रोत
  • सिरजक : ओम बटाऊ ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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