धण रे बळ धणियाप, सटळ्या नर भी सांचवै।

पोरस तणे प्रताप, कठिण बडप्पण काळिया॥

स्रोत
  • पोथी : केसरी सिंह बारहठ ,
  • सिरजक : केसरी सिंह बारहठ ,
  • संपादक : फतहसिंह मानव ,
  • प्रकाशक : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली ,
  • संस्करण : द्वितीय
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