बंधी तलीया तोरणह, गूड़ीय वन्नरवाळि।

दीसइ दीवाळी-तणा, उच्छव हुई अगाळि॥

स्रोत
  • पोथी : सदयवत्स वीर प्रबंध ,
  • सिरजक : भीम ,
  • संपादक : डॉ. मंजुलाल मजमुदार ,
  • प्रकाशक : सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर ,
  • संस्करण : प्रथम
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