रे देवगिरि जाणि, जुरे जादव कि नरवइ।

रे गुजरात जाणि, कर्ण चालुक हुयउ।

रे मंडोवर जाणि, जुतइ गाढम करि ग्रहियउ।

रे जलालदीन जाणि, जुरे वेसासि जि ग्रहीयउ।

रे अलावदीन! हम्मीर यहु, दिढ किमाड आडउ खरउ।

रिणथंभि दुर्ग्ग लगंतड़ां, हिव जाणीयइ पटन्तरउ॥

स्रोत
  • पोथी : हम्मीरायण ,
  • सिरजक : भांडउ व्यास ,
  • संपादक : भंवरलाल नाहटा ,
  • प्रकाशक : सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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