अवधि राज करि इधक, महल सुख कीध महाबळ।
सझे त्याग असमेध, दइव जीता बौह नृपदळ।
भार उतारे भोमि, अवधि सैदेह उधारे।
वसे रांम वैकुंठ, विमळ जग जस विसतारे।
अघ नास कहत भाजंत अघ, जनम कोटि कीधा जियां।
जिण वंसि रांम प्रगटे जिकौ, वंस सुधिन रघुवांसियां॥