असवारी उतरै, दसमी पूजन नृप साजै।

आप चढै असि पूठ, बळोवळ त्रंबक बाजै॥

बिसंटाळा कज बिहद, ब्यास कमधज बतलाया।

वरधीचंद नाहरो उभै लंका मझि आया॥

दससीस हूंत कहियौ जदन, भगति भाव अति भेस सूं।

जानकी हेर सब तज जिलौ, आण मिलौ अवधेस सूं॥

स्रोत
  • पोथी : राम रंजाट ,
  • सिरजक : सूर्यमल्ल मीसण ,
  • संपादक : डॉ. उषाकंवर राठौड़ ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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