छंद मुक्तादाम

तजो अब इक्क कुटुंब बचाय।
तजो गृह इक्क सुग्राम सहाय॥
तजो पुर इक्क सुदेस बचाय।
तजो सब आतम हेत सुभाय॥
स्रोत
  • पोथी : हम्मीर रासो ,
  • सिरजक : जोधराज ,
  • संपादक : श्यामसुंदर दास ,
  • प्रकाशक : नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी ,
  • संस्करण : तृतीय
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