गहिली हे मुंधि तोहि लागी छइ वाइ।
अस्त्री लेइ कोइ ऊलग जाइ।
भोली है नारि तू बाउली।
चंद कूड़इ किउं ढांकियउ जाइ।
रतन छिपायउ किउ रहइ।
उवइ वाचाकउ हीणउ पूरव्यउ राउ॥