राम नइं दीधी बधावणी, आई विसल्या एथ्योजी।

हरखित श्रीरामचंद हुया, पूछ्यो कहो कहो केथ्यो जी॥

कहो केथि तेहनइ राजहंसी, परिवरी हंसी करी।

ऊतरी नीची मानसरवर, जेम तिम ते कुंयरी॥

चिहुं दिसइं चामर बीजती नइ, सहेली साथइं घणी।

पदमणी लखमण पासि पहुंती, राम नइ दीधी वधावणी॥

स्रोत
  • पोथी : सीताराम चौपाई ,
  • सिरजक : समयसुंदर ,
  • संपादक : अगरचंद नाहटा, भंवरलाल नाहटा ,
  • प्रकाशक : सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर ,
  • संस्करण : प्रथम
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