पळ बीर बैताल भाराथ पूक्षे।

भये ते जगै आजि होय भूक्षे॥

पिसाच प्रेत भूत भयान।

गिन गीध ते गीध गूद गियान॥

चवसट्ठि ते जुग्गनां तत्थ जानी।

अनै डाकिनी साकिनी सेनि आनी॥

गुमाय गुमाय तत्ती सगि डोलै।

बहौ फ्योकरी फैन तै मद्धि बोलै॥

हर रुण्डमाळ वरं सूर रंभ।

मनौ बावन वीर आये अचंभ॥

नृत नारद प्रीय तै ब्रह्मपूत।

तहा तड़ नदीगन महामत्तं॥

डम डम तै बाजि डोरू डहक्क।

करै काळ भैरों तहां यौ किलक्क॥

खिळ खेचर भूचर मद्धि खेळा।

भये जुद्ध आगम येते सुं भेळा॥

स्रोत
  • पोथी : बिन्है रासौ ,
  • सिरजक : महेसदास राव ,
  • संपादक : सौभाग्यसिंह शेखावत ,
  • प्रकाशक : राजस्थान राज्य प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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