सेठ बोल्यो बेटै स्यूं, कै होस नहीं तनै कोई।
लागै है मनै, कै धन्धो मेरो तूं डुबोवै लो॥
राख्यो है मुनीम, मेरै स्यूं पूछ्या बिना ही।
खोड़ो है, दुकान पर रोज लेट आवै लो॥
बेटो कह्यो बापू, कणां दूर की भी सोच्या करो।
यो खोड़ो मुनीम काम ठीक स्यूं चलावै लो।
थारा नोट देख, जे बिगाड़ी कदै नीत यो तो।
नोट ले’र बेसी दूर, भाज नहीं पावै लो॥