दीन्ही सोपारीयउ नइ हरखिय राय।
मनिहि आणंदियउ अधिक उछाह।
घरि घरि गूड़ी ऊछलइ।
कामणि गावइ छइ मंगलच्यार।
चहुआंणां कुल ऊधरउ।
जइ घरि आविस्यइ जाति पमारि॥