सबळ पखै सुर राय पितमात परमेसरी,

करै कुण थेसरी विगत कोटी।

मेलजे साजै मन हमैं मां ईसरी,

राज राजेसरी रिजक रोटी॥

हेत कर सांकड़ां दाह सब हरीजे,

नेत कर धरीजे हाथ नीका।

करनला भगत पर सुभ निजर करीजे,

जगदंबा दिरीजे आजवीका॥

बैण तर अमी रा आप मुख बोलजे,

बड़ा सुख तोलजे बोल बाला।

राज सगती हमैं रौर दुख रोलजे,

त्रिहूं भाग खोलजे तोड़ त्राला॥

निमो मन पूरणा अस्ट सिध नवोंनिध,

असे धिन आज आनंद आयो।

जात दुख गमै घटती वगत जगदंबा,

पात सुख सांझतो समंद पायो॥

भरै कुण अथग कोठ्यार संकर भणै,

तूझ बिन करै कुण दूर तोटो।

बिना गुण हुवै कोई छोरू बावळो,

मेहाई रावळो बिड़द मोटो।

सबळ पखै सुर राय पितमात परमेसरी॥

स्रोत
  • पोथी : राजस्थानी शक्ति काव्य ,
  • सिरजक : शंकरदान सामौर ,
  • संपादक : भंवरसिंह सामौर ,
  • प्रकाशक : साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली ,
  • संस्करण : द्वितीय
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