मरणो तो पगमइं वहइं, कारिमी काया एहो जी।
विषयारस लुबधा थका, पोखइ करिमी देहो जी।
कारंमी देह समारि सखरी, नरनारी राता रहइ।
पणि धन्य ते जे छोड़ि माया, सुद्ध संयम नइ ग्रहइ।
वलि विषय सुख थी जेह विरम्या, धन्य-धन्य सको कहइं।
चक्रवर्ति सनतकुमारनी परि, मरणो तो पगमइं वहइं॥