जंगली फुरणी जगि रेखि जाणि, खण्डीर निस्सि हइ तासि खाणि।

चापड़इ देद चडि भामि चड्ड, उतराध तणा देसां अगड्ड॥

स्रोत
  • पोथी : छंद राउ जइतसी रउ ,
  • सिरजक : बीठू सूजा ,
  • संपादक : मूलचंद प्राणेश ,
  • प्रकाशक : भारतीय विद्या मंदिर शोध प्रतिष्ठान, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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