जनम मांगिउं स्वामी मारू कइ देसि।

राजकुंवरी अनइ रूप असेसि।

रूप निरूपम मेदिनी।

पहिरणइ लोवड़ी झीणइ रे लंकि।

आछी गोरी धण पातली।

अहर प्रवालीय नइ दाड़िम दंत॥

स्रोत
  • पोथी : बीसलदेव रास ,
  • सिरजक : नरपति नाल्ह ,
  • संपादक : डॉ. माता प्रसाद गुप्त, अगरचंद नाहटा ,
  • प्रकाशक : हिन्दी परिषद प्रकाशन, इलाहाबाद ,
  • संस्करण : द्वितीय
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