जनम मांगिउं स्वामी मारू कइ देसि।
राजकुंवरी अनइ रूप असेसि।
रूप निरूपम मेदिनी।
पहिरणइ लोवड़ी झीणइ रे लंकि।
आछी गोरी धण पातली।
अहर प्रवालीय नइ दाड़िम दंत॥