इत पत्तन अजमेर तजिग आनंदमेय तनु।

सोमेस्वर तस सूनु भयो भूपति मघवा मनु।

पट्ट लहत जिहिं प्रबल गज्जि गुज्जरधर गंजिय।

मरुधर जैसलमेर भुम्मि दब्बि रु अरि भंजिय।

दलि रन अनेक खुरसान दल धारापति रनधीर हनि।

सबनृप हटाय प्रतप्यो सुमति बसुधातल पुरूहूत बनि॥

स्रोत
  • पोथी : वंश भास्कर भाग 3 ,
  • सिरजक : सूर्यमल्ल मीसण ,
  • संपादक : डॉ. चंद्रप्रकाश देवल ,
  • प्रकाशक : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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