ऊलग जाण कहइ धणी कउण।
घर माहे वरउ नहीं कूल्हडइ लूण।
घरि अकुलीणीय रे कलि करइ।
रिण का चंपिया घर न सुहाइ।
कह रे जोगी हुइ नीसरइ।
कह मुहड़उ लेइ नइ ऊलग जाइ॥