हूं विरासी राजा मइ कीयउ दोस।

पगरी पाणहीस्यउ किसउ रोस।

कीड़ी ऊपर कटकी किसी।

म्हे हंस्या थे करि जाणियउ साच।

ऊभीय मेल्हि किउं चालीयउ।

स्वामी जलह बिहूणा किम जीयइ माछ॥

स्रोत
  • पोथी : बीसलदेव रास ,
  • सिरजक : नरपति नाल्ह ,
  • संपादक : डॉ. माता प्रसाद गुप्त, अगरचंद नाहटा ,
  • प्रकाशक : हिन्दी परिषद प्रकाशन, इलाहाबाद ,
  • संस्करण : द्वितीय
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