मइं छंडी हो स्वामी थारी आस।
जोगिणि होइ सेवउं बनबास।
कइ तउ परबत चडउं केदार।
कइ रें हिमालइ माहिं गिलउं।
कइ तउ झंपद्यउं गग दुवारि॥