छंडी हो स्वामी म्हे थारी हो आस।

मइला हो थारउ किसउ वेसास।

बांदी करि धणि नवि गिणी।

म्हाकी सगा सुणीजा माहे लोपी छै माम।

जीवतड़ी मूयां बडइ।

बालुं हो धणी तुम्हारड़ा दाम॥

स्रोत
  • पोथी : बीसलदेव रास ,
  • सिरजक : नरपति नाल्ह ,
  • संपादक : डॉ. माता प्रसाद गुप्त, अगरचंद नाहटा ,
  • प्रकाशक : हिन्दी परिषद प्रकाशन, इलाहाबाद ,
  • संस्करण : द्वितीय
  • पोथी : बीसलदेव रास ,
  • सिरजक : नरपति नाल्ह ,
  • संपादक : डॉ. माता प्रसाद गुप्त, अगरचंद नाहटा ,
  • प्रकाशक : हिन्दी परिषद प्रकाशन, इलाहाबाद ,
  • संस्करण : द्वितीय
जुड़्योड़ा विसै