सात सहेलीय बइठी छइ आइ।

राजा माइ पुजावण जाइ।

चंदन सीप भरी लियइ।

काथउ सोपारीय नइ पका जी पान।

रंग हथलेवउ जोड़ियउ।

जाणे रुखमणि सरिसउ बइठउ छइ कान्ह॥

स्रोत
  • पोथी : बीसलदेव रास ,
  • सिरजक : नरपति नाल्ह ,
  • संपादक : डॉ. माता प्रसाद गुप्त, अगरचंद नाहटा ,
  • प्रकाशक : हिन्दी परिषद प्रकाशन, इलाहाबाद ,
  • संस्करण : द्वितीय
जुड़्योड़ा विसै