आद सगत भणीजै एकूं, उण अवतार मां चरित्र अनेकूं।

जाणए पार कवण गुण जैकूं, तारंग सिला ऊतरी तैकूं॥

मांग मांग कर सांग मुळकै, विद्या मो मन मांगी विलखे।

मुझ मुख थूकियो त्रम्बोल मिलक्कै, बोल बोल मुख खोल वलक्कै॥

प्रांण नाथ प्रणाम प्रमेकूं, मेहरवांण होय जोवत मेंकूं।

बुद्ध दे सुद्ध या मंत्र विमेकू, दरस दिव्य दृष्टि मां देखूं॥

कर त्रिसूळ गंजण केवी, भंजण पिसाचर खुफ्र भरेवी।

अजरा अमर समरतां एबी, सरणागतां रिछ्या करै सेवी॥

क्रोड़ छप्पन चावंड कहाणी, बारे क्रोड़ बचे ब्रम्हाणी।

क्रोड़ नव नांमे कतियाणी, खट क्रोड़ जांमे खत्राणीं॥

लाख नव हरणी लोहवड़ीयाळी, चोसठ जोगण खेलण चाली।

पांच च्यार दुरगा परचाळी, सप्तावत सतियां सिखराळी॥

नव सत सिंणगार रचे नख रत्तुं, रास मंडप करतां चखरतुं।

देवळ प्रकास कियो दर संतू, वास सुगंध मुख हास वरंतूं॥

पोसाक पटोळा चीर पळक्कै, जात जात जंवरात झळक्कै।

भाळ तिलक नथ नाक भळक्कै, रतनमाळ गळ हार रळक्कै॥

गगन मंडळ गीताळ गहक्कै, ठमक पांव पंईयाळ ठहक्कै।

ताल झमक त्रंबाळ तहक्कै, डाक डमक द्रिगपाळ डहक्कै॥

भेर बजत नाचंत भैरवा, वीर बावन बहु रूप बनेवा।

खैत्रपाळ अगवाण खेलेवा, रांमत धरती माढ रमेवा॥

स्रोत
  • पोथी : राजस्थानी शक्ति काव्य ,
  • सिरजक : मेहा बीठू ,
  • संपादक : डॉ. भंवरसिंह सामौर ,
  • प्रकाशक : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली ,
  • संस्करण : द्वितीय
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