गढ अजमेरी बसइ रे भुआल।

चहुआणां कुलि तिलक णिगार।

कुलीय छत्तीसइ रे ऊलगइ।

मइमत्त हस्तीय पडइ रे पलाण।

लाखतुरीय घरि पाखर्‌या।

बर रे आणउ वीसलदे चहुआंण॥

स्रोत
  • पोथी : बीसलदेव रास ,
  • सिरजक : नरपति नाल्ह ,
  • संपादक : डॉ. माता प्रसाद गुप्त, अगरचंद नाहटा ,
  • प्रकाशक : हिन्दी परिषद प्रकाशन, इलाहाबाद ,
  • संस्करण : द्वितीय
जुड़्योड़ा विसै