गढ अजमेरी बसइ रे भुआल।
चहुआणां कुलि तिलक णिगार।
कुलीय छत्तीसइ रे ऊलगइ।
मइमत्त हस्तीय पडइ रे पलाण।
लाखतुरीय घरि पाखर्या।
बर रे आणउ वीसलदे चहुआंण॥