भूप बलवंत दुर्ग नीरमय अद्रिमय अस्समय,

अैसे इष्ट काम मय बखानैं जात।

बनमय मिट्टीमय मरुमय मर्तमय दारुमय,

अेहि जगती में जोग्य जानैं जात॥

अच्छे पहिलैं द्वै इन में रु षट मध्य के जेम मध्य,

अंतिम कों अधम प्रमानें जात।

अन्न जल दारु घृत तैल नालि गोले आदि,

दुर्ग बिच संचय समस्त के ठानें जात॥

स्रोत
  • पोथी : बलवद विलास ,
  • सिरजक : सूर्यमल्ल मीसण ,
  • संपादक : सौभाग्यसिंह शेखावत ,
  • प्रकाशक : राजस्थान साहित्य अकादमी (संगम), उदयपुर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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