(1)

राजनीति तो गादड़ी
रीत-नीत रो नांव नीं
डाकण स्यारी डावड़ी।

(2)

मतलब रै संसार में
माल लुटायो सांवरा
महक कठै ई हार में।

(3)

पुतळो माटी फूटसी
खूटै कोनी कातणो
झूटो वादो टूटसी।

(4)

मतीरियो रोड़ो रुळै
बळै बियां ई आग तो
काकड़ियो काणो गळै।

(5)

ढूंढ़ै कोनी बावळा
फुलवाड़ी आ राख-सी
बच्या खुच्या पांगळा।

(6)

बतळावण अब कठै
खून नवो गरणांवतो
बूढ़ा नै बूझै कठै।

(7)

छांव मोठ री ढूढ़तो
सुसियो सिसकै तावड़ै
गादड़ आसी सूंघतो।

(8)

सेवा दोरी सासरै
पीहर भावै मोकळो
झूरै सूनै आसरै।

(9)

ना चौपड़ ना हड़दड़ो
सूनी बिलखै चांदणीं
चांद सड़ै खाडै पड़्यो।

(10)

खेजड़ खोखा बांटती
खात खेत री सांतरी
ताप थार री काटती।

(11)

समझौतो कर चालिये
दसा दिसा नै जाणले
बैर कदै नीं पाळिये।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मुखराम माकड ‘माहिर’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-34
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