सपतामत नांम सु आद सकत्तीय, तातन मात न जात तया
विख्यात चरित्त बहुत्त बणावत, जो अंणु आवत हाथ जया
भवनाथ उपावत तीन विभूतियों, खेल देखावत ख्या अख्या
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥
थापंग जुदा अंग जग्ग सथापन, पालण पंच किया प्रमणू
दुणियंग चंदा झिग्गमिग उड्डगण, बालाय रूप नमो विष्णू
मुंणिया लग थग्ग अथग्ग मराळ, संभालग लिच्छमीनाथ सया
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥
वेदंग भणंद मारे मधुकेटभ सेस निकंद मुकुंद सथें
फोरहंद गिरंद मणंद फणंधर, मंद्र समुंद्र जलंदर मथें
लछ मोरंद कोरंद सोज लिया, मुक्ख अंद संखासुर होड़ थया
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥
वाराह अवतार बधार वदनं, मंड संसार साधार मही
अधनार आकार नरांअधमी, नरसी तन धारओजार नहीं
हरि नक्ख बधार मारयौ हिरणाकुस, उत्थ उबार सुरां अमिया
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥
ब्रम्हांण रूद्रांण सुथांन विराजण, विस्सनु आंण घरांण बसी
जग चक्ख जड़ांण जीते जमरांण, जुड़ांण जुधां द्विजराम जिसी
मही मांयण वांमण डांण मलफ्फत, जांण आपांण जया विजया
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥
सुंभ निसुंभ सूं पाखती संग हि, जीत जमंग जुधां जुड़ीया
चण्ड मुण्ड दहीत संहारती चांमुण्ड, सुक्र अड़ी तूंह संकड़ीया
धुम्रलोचन रग्गत बीच विधुंसिया, राकस केताही रोळविया
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥
तारासुर त्रिपुर मार मैंकासुर, संधर कंधर सेल सिलं
करमां ग्रहे खंजर काळ जमंकर, पांण आसापुर घाव प्रलं
सब मंड अखेवर चन्द्र सखेवर, हाथमा जेवर दईत हया
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥
मिल राम महाबळ लंक परज्जळ, दहूं सैना चळ आसदळां
मिल गया कुळ सब्बळ भुज्ज हिलो मिल, खग्ग झिलोमिल सीस खळां
निम नेकस नंदल क्रग पगां न्रिळ, प्रगळ हाथळ दैत पया
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥
जळ बम्ब जिथे थळ बंसोय जोगण तूं, पळ बंब भ्रंखंत पळा
सिव बम्ब सुणे माहाभारथ कोसंभ, कौरव बम्ब अनंत कळा
बज्र बम्ब ब्रिळम्ब बणावत, थे नर भ्रात के साथ थया
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥
भाखत सीखत गुणंत भणंत, मोहरत्ती विखंत रखं
सहाय सुभट्ट समाधीय सूरत, व्रख कुमत्ती कुखत्री भखं
जांणत जगत जरा सिंधु जीते, कृष्ण पाराक्रम अंत किया
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥
ब्रम्हांड ब्रहैमध आवत बम्बीय, जावत बम्बीय जोत जुरी
मकरंद सो बम्बीय बम्ब मयंदीय, ध्यावत बम्बीय ध्यान धुरी
बहुतीरथ बम्ब अमरत्त सो बम्बीय, चराधर बम्ब चरित्त चया
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥
गुरां पास सन्यास उदयास देरी गत, तूं अहीवास निवास तूं ही
पुस्तक्क प्रकास प्रवेस मही पर, सास उसास वही सबही
चपळास विलास आकास धुरे चित्र, मांही हुलास तू जोगमया
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥
हेमंग धुमंग अलंग सथे होय, रंग सुरंग सरग्ग वसी
सरबंग के संग तूं वास सदामत, वाद विड़ैय उरग्ग बसी
जुग जुग्ग अभंग सौवंग जुगां, लंग भंज ओलंग कोलंग लया
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥
ओपत्त खपत्त उकत्त उचारत, मत्त कुमत्त विचार मया
नर तंत्र नेत्रां नित्त निहारत, तंत्र तूं मंत्र तूं जंत्र तया
तन तंत्र सुतंत्र विचार तणोतय, भाखत संत भया अभया
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥
धर अम्बर अध्धर पध्धर धरि, जेथ नदी झरणां झरियां
थारा केह गिरां घर मंद्रस्था, वरतेथ तखतांह केतरीयां
भ्रख लेत भैंसावर भोग पतर भर, तंत निरंतंर भारतया
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥
क्रम ध्रम्म सुध्रम्म बुधा निकलंकीय, तेज मंणी हिंगळाज त्रसंग
सातादीप मणी नवखंड सोभा सुध, देव मणी सभ चित्र द्रसंग
प्रगट्ट मणी मांमट सुपुत्रीय, नेमत ऊभट नाम नया
रमती घट पालट आद जुगां, रंग रूप नमो गिरमाड़ रया॥