उठै भीम हरवळां, हुवौ खूमांण हठाळौ।
अवर खांन ऊबरां, चढ़े लसकर कळिचाळौ।
तोप दगे तिण वार, अवर आरबा अपारां।
ओळां जिम पड़ि असण, धोम गोळां धोमारां।
उडि कोहक वांण सिर धड़ उडै, गज भिड़ज्ज भड़ पड़ि गरा।
खुरमरा थाट आया खड़े, भिड़ज उपाड़े ‘भीमरा’॥