दखिण धरा रस दियौ, असह नह करै इरादौ।
दिली लियण जिण दीह, जोम भरियौ साहिजादौ।
देखि चहन दळथंभ, सीख मांगे तै सायत।
दीध सीख दळ लियण, असप गज करे इनायत।
हुय विदा सझे दळ हालियौ, साझण कज सुरतांणरौ।
जोधांण अयौ जोधांणपति, जगे भाग जोधांणरौ॥