मछरे माल सुतन्न, बबरि फूलेवि त्रिसळ निलवटै।
सादै वयण पयंपे, झूझाणं दळ धारिस्सि॥
सुभटं वीर समथं, बेपख सूध पंचयण बत्थं।
चलि आवीया चलत्थं, अम्ह आइस्स अस्सि आरत्ति॥
पट साहण पवंगा, ओपति जाहं सूर निज अंगा।
सुभटां देह सुचंगा, अरि फौजां डोहण अणभंगा॥
तेजो पाखरीया तोखारं सिलहपोस राउत ग्रहि सारं।
पवंगे आरोहिता पमारं, अरस थका आया असवारं॥
कड़े चढे राठौड़ कंधारं पिड़ि साम्हा आवीया पमारं।
धड़ बेहड़ा चढ़ेस्ये धारं आज भड़ां भाजैं ओ धारं॥