कमंध ये सुणी कथं। सुमेळ सुभट सथ॥
करै विचार काम रै। नरिंद इंद नाम रै॥
‘औरंग’ ही आवियौ। धैघीग मत्त धावियौ॥
‘मुरादसाह’ मंझ ले। सिरै ऊजेणि सालुळे॥
अपार सेनि आविया। सपार निद्ध पाविया॥
उजेणि हूत ऊ चले। कमध सूर सकळे॥
खुमाण वस खीचिय। नवै न अखि नीचय॥
गणै स गौड़ गाढ रा। ब्रजागि खाग बाढ रा॥
चह्वाण पाण चाव रा। दखै पमार दाव रा॥
हाला झाला हूळसै। केवाण देवाडा कसै॥
कुरम भीच भाटिय। खगे स व्रद खाटिय॥
चाहिल मौहिल चवै। खभे अकास ते खवै॥
जाड़ेच जेठवा जिता। पुडीर धीर पं पिता॥
सौळ ख सूमर सजै। गहीर तूवर गजै॥
पुणै स पढियार य। सीसोध जोध सारय॥
साखूळ हूल सैगर। भदौड़ ठौड़ ते भर॥
कठोड़ जौड़ धाकड़। लखे स लोह लाकड़॥
गोहील पब्बिया गणै। रूपै स अगद रणै॥
ऊमट थट वौवच। पुणै नूबाण पौवच॥
बड स गूजर बर। सुभट्ट ब्रद्धि सूधर॥
रावत्त चंदरावत। अपार ते सेखावत॥
खैराड़ डौडिया खड़े। अकास सीस तै अड़ै॥
कटौछ मौछ टाकय। धरा असीस धाकय॥
बढेल बाघैला बळी। रहै स झूझ री रळी॥
देवत्त तन्न दाहिवा। गयंद फौज गाहिवा॥
सम्भलवास मंझ रै। सुणैल जादवा सिरै॥
चवै चंदेल चूगड़ा। दळां खळां स द्रगड़ा॥
सौढा दौड़ा सोनगरा। खड़ग हथ्थ ते खरा॥
दह्या स जौहिया दखे। प्रमाण चाढणा पखे॥
बाळेस गोहिल बह। मुंडै न खग्ग ते मुह॥
हाडा आडा पैडै हठी। करै स्कंध कठठी॥
तवै स भींच तावरा। चवै अगंद चावरा॥
बणै छतीस बसय। अबीह ते अससय॥
चढै इती चमू चली। हैकपि प्रथमी हली॥
पछीन मग्ग पाबिया। खाचरोद आविया॥