बथां भरै गळबाह, हथां जमदाढ़ झळाहळ।

जड़ै घंटा जरदाळ, भिड़ै नीकळै झळाहळ।

बकै छकै बिकराळ, धुकै ऊचकै पड़ै धर।

निहंग हंस नीझकैं, अगन भभकै धर अंबर।

पाड़ियौ ‘भीम’ खागां पछटि, गयौ खुरम लसि कुरंग गति।

गहतंत एम जीतौ ‘गजण’, पूरब धर जोधांणपति॥

स्रोत
  • पोथी : सूरजप्रकास भाग 2 ,
  • सिरजक : करणीदान कविया ,
  • संपादक : सीताराम लालस ,
  • प्रकाशक : राजस्थान राज्य प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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