बथां भरै गळबाह, हथां जमदाढ़ झळाहळ।
जड़ै घंटा जरदाळ, भिड़ै नीकळै झळाहळ।
बकै छकै बिकराळ, धुकै ऊचकै पड़ै धर।
निहंग हंस नीझकैं, अगन भभकै धर अंबर।
पाड़ियौ ‘भीम’ खागां पछटि, गयौ खुरम लसि कुरंग गति।
गहतंत एम जीतौ ‘गजण’, पूरब धर जोधांणपति॥