बंभण भाट बोलाविया राउ।

लगन सोपारीय दीन्ही पठाइ।

गढ़ अजमेरि नइ गम करउ।

पाटि वइसारि पखालिज्यो पाय।

बेटी कहिज्यो राजा भोज की।

राजमति बर बीसल राय॥

स्रोत
  • पोथी : बीसलदेव रास ,
  • सिरजक : नरपति नाल्ह ,
  • संपादक : डॉ. माता प्रसाद गुप्त, अगरचंद नाहटा ,
  • प्रकाशक : हिन्दी परिषद प्रकाशन, इलाहाबाद ,
  • संस्करण : द्वितीय
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