मलपें मयपत नारी जेम, वचन विरस चित धरे पेम।

अमंगल सींधू नद गावती, छल धरती ड़ा कुल वावती॥

स्रोत
  • पोथी : खुमाण रासौ (छठौ खंड) ,
  • सिरजक : दलपत विजय ,
  • संपादक : ब्रजमोहन जावलिया
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