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अंजस सोशल मीडिया
मलपें मयपत नारी जेम
दलपत विजय
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मलपें
मयपत
नारी
जेम,
वचन
विरस
चित
न
धरे
पेम।
अमंगल
सींधू
नद
गावती,
छल
धरती
ड़ा
कुल
वावती॥
स्रोत
पोथी
: खुमाण रासौ (छठौ खंड)
,
सिरजक
: दलपत विजय
,
संपादक
: ब्रजमोहन जावलिया
जुड़्योड़ा विसै
त्याग
वीर
नदी