चित्रकोट चउरासी सरें।

परवत मोटो छें ऊपरें॥

च्यारें दिस सरिखो चउसाळ।

वसुधा तिलक वण्यो सुविसाल॥

भावार्थ :- मेवाड़ के चौरासी दुर्गों में सर्वोपरि दुर्ग चित्तौड़गढ़ एक बड़े पर्वत के ऊपर स्थित है। चारों दिशाओं में समान रूप में खुला हुआ यह दुर्ग भू-मंडल के विशाल तिलक के समान निर्मित या सुशोभित है।

स्रोत
  • पोथी : खुमाण रासौं (खुमाण रासौं) ,
  • सिरजक : दलपत विजय ,
  • प्रकाशक : ब्रज मोहन जावलिया
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