करैं गान पसु पच्छी मोहैं।

कहो जगत इन पटतर को हैं॥

लै लै गैंद परसपर मेलैं।

बाल बृंद मिलि मिलि सुख झेलैं॥

स्रोत
  • पोथी : हम्मीर रासो ,
  • सिरजक : जोधराज ,
  • संपादक : श्यामसुंदर दास ,
  • प्रकाशक : नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी ,
  • संस्करण : तृतीय
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