कहिसि कुणहनीय घरि गूझो, मोटां सिउं मांडिसि झूजो।

अणविमास्यां करिसि काज, तं करेवं जिणि हुइं लाज॥

स्रोत
  • पोथी : रास और रासान्वयी काव्य (बुद्धिरास) ,
  • सिरजक : शालिभद्र सूरि ,
  • संपादक : डॉ. दशरथ ओझा, डॉ. दशरथ शर्मा ,
  • प्रकाशक : नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी ,
  • संस्करण : प्रथम
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