इम सुणि रांवण कोपियो जीहो, मांडियो जुद्ध विभीषण साथि के।

बांण वाहइं ते विहुंगमा जीहो, तीर भाथा भरी धनुष ले हाथि के॥

स्रोत
  • पोथी : सीताराम चौपाई ,
  • सिरजक : समयसुंदर ,
  • संपादक : अगरचंद नाहटा, भंवरलाल नाहटा ,
  • प्रकाशक : सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर ,
  • संस्करण : प्रथम
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