राणी हे सखि राणि हे अति हे सरूप,

एहवी हे सखि एहवी नारि म को अछै जी।

भमरा हे सखि भमरा भमइं अनंत,

नारि हे सखि नारि हे सहु तिण पछै जी॥

स्रोत
  • पोथी : पद्मिनी चरित्र चौपाई ,
  • सिरजक : कवि लब्धोदय ,
  • संपादक : भंवरलाल नाहटा ,
  • प्रकाशक : सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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