जूनौ कोस
नूवौ कोस
लोक परंपरा
ई-पुस्तक
महोत्सव
Quick Links
जूनौ कोस
नूवौ कोस
लोक परंपरा
ई-पुस्तक
महोत्सव
साइट: परिचय
संस्थापक: परिचय
अंजस सोशल मीडिया
माखण मुखमल परि सुकमाल
कवि केशव 'कीर्तिवर्धन'
Favourite
Share
Share
माखण
मुखमल
परि
सुकमाल,
कंचण
वरण
सरीसा
गाल।
गुरु
प्रिय
वयण
वयण
सुसार,
अमृत
पूरण
करण
उदार॥
स्रोत
पोथी
: सदयवत्स सावलिंगा चउपई
,
सिरजक
: कवि केशव 'कीर्तिवर्धन'
,
संपादक
: डॉ. मंजुलाल मजमुदार
,
प्रकाशक
: सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर
,
संस्करण
: प्रथम
जुड़्योड़ा विसै
आँख
चै'रौ
देह