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साइट: परिचय
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मइ एकलउ मारगि जाए
शालिभद्र सूरि
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मइ
एकलउ
मारगि
जाए,
अणजाणिउ
फल
किमइं
म
खाए।
जिमतां
माणस
द्रेठी
म
देजे,
अकहि
परि
घरि
किंपि
म
लेजे॥
स्रोत
पोथी
: रास और रासान्वयी काव्य (बुद्धिरास)
,
सिरजक
: शालिभद्र सूरि
,
संपादक
: डॉ. दशरथ ओझा, डॉ. दशरथ शर्मा
,
प्रकाशक
: नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी
,
संस्करण
: प्रथम
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