मइ एकलउ मारगि जाए, अणजाणिउ फल किमइं खाए।

जिमतां माणस द्रेठी देजे, अकहि परि घरि किंपि लेजे॥

स्रोत
  • पोथी : रास और रासान्वयी काव्य (बुद्धिरास) ,
  • सिरजक : शालिभद्र सूरि ,
  • संपादक : डॉ. दशरथ ओझा, डॉ. दशरथ शर्मा ,
  • प्रकाशक : नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी ,
  • संस्करण : प्रथम
जुड़्योड़ा विसै