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जणि वारितउ गामि म जाए
शालिभद्र सूरि
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जणि
वारितउ
गामि
म
जाए,
तं
बोले
जं
पुण
निरवाहे।
पातु
कांइ
हींडि
म
मांगे,
पाछिम
राति
बहिलु
जागे॥
स्रोत
पोथी
: रास और रासान्वयी काव्य (बुद्धिरास)
,
सिरजक
: शालिभद्र सूरि
,
संपादक
: डॉ. दशरथ ओझा, डॉ. दशरथ शर्मा
,
प्रकाशक
: नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी
,
संस्करण
: प्रथम
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