असपति घड़ि विसमां वींदणी, भमुह चढावें मेलें अणी।

जरह कंचुकी भीड़त अंग, विलकुलियो मुख रातो रंग॥

स्रोत
  • पोथी : खुमाण रासौ (छठौ खंड) ,
  • सिरजक : दलपत विजय ,
  • संपादक : ब्रजमोहन जावलिया
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