तिहीं ठौर बित्त्यौ सुसारौ बसंत।

रमै पातसाहं मनों रत्तिकंतं॥

तिहीं ठौर ग्रीखम्म किन्नौ प्रबेसं।

महा संकुलं बृक्ष राजं सुदेसं॥

स्रोत
  • पोथी : हम्मीर रासो ,
  • सिरजक : जोधराज ,
  • संपादक : श्यामसुंदर दास ,
  • प्रकाशक : नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी ,
  • संस्करण : तृतीय
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